महमूद गजनवी का प्रारम्भिक जीवन 

महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) का जन्म वर्तमान दक्षिणपूर्व अफगानिस्तान के गजनी जिले में 02 नवम्बर 971ईस्वीमें हुआ था | उसके पिता सबुक्तगिन एक तुर्की मामलुक था जिसने गजनी साम्राज्य की नींव रखी थी |
उसकी माँ एक ज़बुलिस्तान के एक कुलीन परिवार की बेटी थी | 994 ईस्वी से वो अपने पिता के साथ युद्ध अभियानों में लग गया था और 998 ईस्वी ने गजनी का युद्ध जीतकर अपने पिता की सत्ता सम्भाल ली | वहा से वो कांधार के हिस्से को हरानेऔर जीतने के लिए आगे बढ़ा |
महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) ने अपने विजय अभियानों की शुरुवात भारत में उस दौर में की थी जब राजपूत शक्ती क्षीण हो रही थी |
महमूद को इस्लाम का योद्धा माना जाता है और यह कहा जाता है कि उसने भारी धार्मिक कट्टरता का परिचय दिया । वास्तव में महमूद एक मूर्तिभंजक आक्रमणकारी था । उसके आक्रमणों का उद्देश्य धन – प्राप्ति था जिससे मध्य एशिया में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया जा सके । प्राचीन काल से ही भारत में मन्दिर
हिन्दुओं के सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के केन्द्र थे ।
मूर्तियों के साथ – साथ इन्हीं मन्दिरों में सोना , चाँदी , हीरा – जवाहरात और खजाना आदि रखा जाता था । महमूद ने इन मन्दिरों का धन – सम्बन्धी महत्व अच्छी तरह समझ लिया था । यह सच है कि मन्दिरों के धन ने ही उसकी वित्तीय व्यवस्था को सुरक्षित किया और यही धन सेना को सुगठित और शक्तीशाली बनाने में लाभदायक
सिद्ध हआ ।
लड़ाई के समय अपने मुस्लिम भाइयों की सहानुभूति और सहायता प्राप्त करने के लिए महमूद ने मन्दिरों को तहस – नहस किया तथा धन लूटकर ले गया ।
 इस प्रकार महमूद के भारतीय हमले धन प्राप्त करने के लिए एक साधनमात्र थे , जिनका उद्देश्य था मध्य एशिया में तुर्की – फारसी साम्राज्य की स्थापना । यह सिद्ध हो चुका है कि महमूद ने भारत में कोई स्थायी राज्य बनाने का लक्ष्य नहीं रखा क्योंकि वह लगातार गजनी लौटता रहा ।
 उसने ध्यानपूर्वक विजयी इलाकों का बन्दोबस्त कभी नहीं किया । साथ ही उसने जीते हुए इलाकों को अपने राज्य में नहीं मिलाया । पंजाब तक का सम्पन्न राज्य उसने अपने राज्य में देर से ( सन् 1021 – 1022 में ) मिलाया । मध्य एशिया का विशाल साम्राज्य भारतीय धन से संगठित हो सकता था । इस भांति भारत पर किये गये महमूद के आक्रमण आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्त्वपूर्ण कहे जा सकते हैं । 
सन् 1000 से पहले ही भारत पर अनेक आक्रमण किये जा चुके थे जैसे यूनानियों , कुषाणा , शको , हुणों , अरबों आदि के आक्रमण ।
 कालान्तर में उनके अवशेषों को भारतीय संस्कृति और सामाजिक संगठनों ने अपने में खपा लिया । किन्तु अनेक कारणों से महमूद के आक्रमण अत्यन्त महत्वपूर्ण थे । इसका प्रधान कारण यह है कि इन्हीं के द्वारा मुस्लिम राज्य की स्थापना के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ ।
पंजाब के सीमान्त प्रदेश की महत्व – प्रतिष्ठा भारत के इतिहास पर अधिक थी । इन आक्रमणों से भावी विजेताओं , विशेषकर मुहम्मद गोरी का कार्य सुगम हो गया । 
इस्लाम धर्म का प्रतिनिधित्व करने वाले तुर्क थे ।महमूद के आक्रमण के समय एक बहुत बड़ा विद्वान् अलबरूनी भारत आया , जिसकी पुस्तक किताबुलहिन्द तत्कालीन इतिहास को जानने का एक महत्वपूर्ण साधन है ।
 इसमें भारतीय इतिहास , भूगोल , खगोल , दर्शन आदि को समीक्षा की गई है । धीरे – धीरे लाहौर फारसी संस्कृति का केन्द्र बन गया ।
भारत में तुर्क – फारसी प्रशासनिक संस्थाओं का कार्य हुआ । महमूद और उसके उत्तराधिकारी मसूद ने हिन्दुओं को बड़ी संख्या में रोजगार दिया । मसूद की सेना में आधे हिन्दू ही थे । इनमें सेवंद राय और तिलक के नाम प्रमुख हैं जो उच्च पदों पर थे । भारत से वह अनेक  कारीगर ले गया जिन्होंने आपनी कला कृतियों द्वारा 
महमूद के नाम को तत्कालीन मुस्लिम जगत में प्रतिष्ठित कर दिया और मध्य एशिया को भारत की सांस्कृतिक देन से लाभान्वित किया ।

भारत पर किया 17 बार आक्रमण

महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) ने अपने जीवन में कभी भी शिकस्त नही खाई थी | ऐसा कहा जाता है कि वो हमेशा भारत पर गर्मी के दिनों में आक्रमण करता था और मानसून शुरू होने के साथ वापस गजनी लौट जाता था । इसका प्रमुख कारण था कि वो पंजाब की बहती नदियों से बचना चाहता था और उसे डर था कि उसकी सेना उन नदियों से अटक न जाए | उसके इस 17 आक्रमणों में उसने कई साम्राज्यों को नस्तेनाबुद कर दिया था |

अपार धन सम्पदा वाले सोमनाथ मन्दिर को लूटा

महमूद गजनवी (Mahmud Ghaznavi) का सबसे प्रसिद्ध और क्रूर आक्रमण गुजरात के सोमनाथ मन्दिर पर था | सोमनाथ मन्दिर गजनी से बहुत ज्यादा दूर था इसलिए अभी तक उसकी नजर उस पर नही पड़ी थी | सोमनाथ मन्दिर अपने अपार खजाने के लिए मशहूर था | उस मन्दिर में 1000 पुरोहित शिवजी की 
सेवा करते थे | हजारो नर्तक और गायक उस मन्दिर के द्वार पर अपना प्रदर्शन देते थे | वहा पर एक प्रसिद्ध हीरे जवाहरातो से जडित एक शिवलिंग था जिसे बहुत पवित्र माना जाता था |अपने पवित्र मन्दिर को बचाने के लिए हिन्दू राजपूत महमूद गजनवी की सेना के आगे आये |
उधर गजनवी की सेना “अल्लाह-हु-अकबर” चिल्लाते हुए मन्दिर में प्रवेश करने का प्रयास कर रही थी | हिन्दू राजपूतो ने बहादुरी के साथ आक्रमणकारियों का सामना किया और मन्दिर को नुकसान नही पहुचने दिया | यह लड़ाई तीन दिन तक चली | तीन दिनों के बाद आक्रमणकारी सोमनाथ मन्दिर में प्रवेश करने में सफल
 रहे | गजनवी ने अपने सैनिको को पवित्र शिवलिंग को नष्ट करने के लिए कहा | उसने मन्दिर का सारा खजाना लुट लिया | ऐसा कहा जाता है कि उसने सोमनाथ मन्दिर से 20 मिलियन दीनार धन प्राप्त किया जो उसके पहले आक्रमण से मिले धन से आठ गुना ज्यादा था |
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