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J.R.D TATA Hindi

  जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा  

Jahangir Ratan Ji Dada Bhai TATA

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Business houses में से एक Tata- Group के चेयरमैन रहे जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जे. आर. डी. टाटा की

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JAHANGIR RATAN JI DADABHAI TATA

The Man Who Gave India Wings

भारतीय उद्योगजगत की शान माने जाने वाले जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा एक निर्भीक विमान-चालाक और अपने समय से कहीं आगे का सोचने वाले विजनरी थे। आधुनिक भारत की औद्योगिक नीव स्थापित करने वाले प्रमुख उद्योगपतियों में उनका नाम स्वर्णाक्षरों से अंकित है।

किसी भी विकासशील देश को तेज़ी से प्रगति पाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुविधाओं से जुड़े उद्योगों के सफल होने की आवशयकता होती है।

जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा या जे.आर.डी. टाटा भारत के अग्रणी उद्योगपति थे। आधुनिक भारत की औद्योगिक बुनियाद रखने वाले उद्योगपतियों में उनका नाम सर्वोपरि है।

  • भारत में इस्पात 
  • इंजीनीयरींग 
  • होट्ल 
  • वायुयान और 
  • अन्य उद्योगो के विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 
  • जे.आर.डी. टाटा ने देश की पहली वाणिज्यिक विमान सेवा ‘टाटा एयरलाइंस’ की शुरुआत की, जो आगे चलकर सन 1946 में ‘एयर इंडिया’ बन गई। 

इस योगदान के लिए जेआरडी टाटा को भारत के नागरिक उड्डयन का पिता भी कहा जाता है। 

देश के विकास में उनके अतुलनीय योगदान को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उन्हें उन्हे सन 1955 मे पद्म विभूषण और 1992 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मनित किया।

उन्होंने अपने कुशल नेतृत्व से टाटा समूह को देश के अग्रणी उद्योग घराने में बदल दिया और कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं शुरू कीं जिन्हें बाद में भारत सरकार ने भी अपनाया।
J.R.D TATA Hindi
उन्होंने टाटा समूह के कंपनियों में

  • आठ घंटे का कार्यदिवस, 
  • निःशुल्क चिकित्सा सहायता, 
  • कर्मचारी भविष्य निधि योजना और
  • कामगार दुर्घटना मुआवजा योजना 

जैसी योजनाओं को भारत में पहली बार शुरू किया। इस प्रकार जेआरडी टाटा ने भारतीय कंपनी जगत में पहली कापरेरेट गवर्नेंस और सामाजिक विकास की योजनाएं प्रारंभ की। जेआरडी टाटा भारत में पायलट लाइसेंस पाने वाले प्रथम व्यक्ति थे।

प्रारंभिक जीवन बचपन और शिक्षा

जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा का जन्म 29 जुलाई 1904 में पेरिस, फ्रांस में हुआ था। वह एक मशहूर भारतीय पारसी परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता रतनजी दादाभाई टाटा एक सफल उद्योगपति थे और माता श्रीमती सुज़्ज़ेन ब्रीरे एक फ्रेंच महिला थीं।

JRD Tata के बचपन का बड़ा हिस्सा फ़्रांस में बीता इसलिए फ्रेंच उनकी पहली भाषा थी। वे पेरिस के Janson De Sailly School में पढने जाया करते थे। उनकी पढाई फ़्रांस, जापान, और इंग्लैंड में हुई.

1923 में उनके पिताजी ने उन्हे ब्रिटेन भेजा ताकि वह अपना अंग्रेज़ी ज्ञान बढ़ा सकें और ब्रिटिश यूनिवर्सिटी में दाखिला ले सकें। वहां उन्होंने ग्रामर स्कूल में पढ़ाई की और जब यह कोर्स पूरा हुआ तो वह कैम्ब्रिज से इंजीनियरिंग करने की सोचने लगे। लेकिन तभी फ़्रांस में आए एक नये कानून के अनुसार फ्रांस में 20 वर्ष की आयु के ऊपर के हर युवा को सेना में भरती होना अनिवार्य हो गया। अतः वे फ्रेंच आर्मी में शामिल हो गए. वे आगे भी सेना में ही रहना चाहते थे, लेकिन उनके पिता जी इसके लिए तैयार नहीं हुए, इसलिए उन्हें सेना छोड़ना पड़ी।
उनके पिताजी Tata Group के  founder जमशेदजी टाटा के चचेरे भाई थे। और उनकी माता भारत की पहली महिला थीं, जिन्होंने कार ड्राइव की थी।

JRD Tata की भतीजी, रतनबाई पेटिट, मुहम्मद अली जिन्ना की पत्नी थी, जो अगस्त 1947 में पाकिस्तान के संस्थापक बने।
JRD वर्ष 1922 में पहले ही अपनी माँ को खो चुके थे और 1926 में वे जब लगभग 22 साल के हुए तभी उनके पिताजी की मृत्यु हो गयी।

टाटा ग्रुप में प्रवेश

सन 1925 में एक Intern के रूप में टाटा एंड संस में उन्होंने कार्य प्रारंभ किया। अपनी कड़ी मेहनत, दूरदृष्टि और लगन से वे सन 1938 में भारत के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा एंड संस के अध्यक्ष बन गए। इस पद पर वे 50 साल से अधिक तक बने रहे, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा कीर्तिमान है।

जब JRD चेयरमैन बने तो टाटा ग्रुप के अन्तरगत 14 उद्यम चलते थे, और अपने रिटायर होते-होते उन्होंने इसकी संख्या 95 तक पहुंचा दी। अपने बेहद सफल टेन्योर के दौरान उन्होंने टाटा ब्रांड को घर-घर तक पहुंचा दिया और केमिकल, ऑटोमोबाइल, चाय, IT, जैसे क्षेत्रों में टाटा को भारत की अग्रणी कंपनियों में शामिल कर दिया।

युग निर्माता JRD के जीवन की खास बातों को जानें

  

नागरिक उड्डयन के जनक

1929 में उन्होंने अपनी फ्रेंच नागरिकता त्याग दी और भारत की नागरिकता ले ली। इसी वर्ष पायलट का एग्जाम पास करने वाले पहले भारतीय बने। और आगे चल कर 1932 में भारत देश में वाणिज्यिक विमान सेवा (टाटा एयर लाइन्स ) की शुरूआत जे.आर.डी टाटा ने ही की। जो आने वाले भविष्य में रूपांतरित हो कर देश की राष्ट्रीय विमान सेवा “एयर इंडिया” बनी। इसी कारण उन्हें भारत के “नागरिक उड्डयन का जनक ” भी कहा जाता है।

TATA Airlines की पहली फ्लाइट उड़ाने का साहसिक काम खुद JRD Tata ने ही किया था। 5 अक्टूबर, 1932 के दिन “द लेपर्ड मॉथ ” एयरक्राफ्ट मुंबई से कराची उड़ा कर आए थे। उस समय यह कारनामा बहुत ही साहसपूर्ण और प्रसंशनीय था। आने वाले समय में एक बार फिर उन्होंने वर्ष 1962 में 58 वर्ष की आयु में, और उसके बाद वर्ष 1982 में उसी तारीख को 78 वर्ष की उम्र में उसी रूट पर वही विमान उड़ाया था।

फॅमिली बिजनेस को प्रोफेशनल बिजनेस बनाया 

JRD ने अब तक चली आ रही प्रथा की कम्पनी के प्रमुख पदों पर परिवार के लोग ही नियुक्त होंगे को तोड़ा और business operations run करने के लिए professionals को hire करना शुरू और within company promote करना शुरू किया। इस तरह से उन्होंने भारतीय उद्योगों को सफल होने का सही मार्ग दिखाया और entrepreneurial talent and expertise को बढ़ावा दिया।

एम्प्लाइज वेलफेयर स्कीम्स की शुरुआत 

आज एम्प्लोयीज जिन सुविधाओं को for granted लेते हैं उसे कॉर्पोरेट इंडिया का पार्ट बनाने के पीछे भी JRD Tata का हाथ है।

आठ घंटे का ऑफिसमुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएंकर्मचारियों का प्रोविडेंट फण्डएक्सीडेंट कंपनसेशन स्कीम्स, इत्यादि

उन्ही की कल्याणकारी सोच का परिणाम है। बाद में इन welfare provisions मे से बहुत सारे कार्यक्रमों को भारत सरकार ने बाद में कानून के तौर पर लागू किया।

गया और Workmen Compensation Act में जगह दी गयी।

JRD टाटा का मानना था कि जिस समय से कर्मचारी काम के लिए निकलता है उस समय से लेकर जब तक वो वापस अपने घर नहीं पहुँच जाता तब तक वह कम्पनी की जिम्मेदारी है और यदि इस दौरान उसे कुछ होता है तो कम्पनी उसके लिए financially liable है।

भारतीय उद्योग के लिजेंड JRD Tata 1991 तक चेयरमैन पद पर बने रहे और इसके बाद उन्होंने अपना कार्यभार रतन टाटा के मजबूत कन्धों पर डाल दिया।

अपने कार्यकाल के दौरान JRD ने Tata-Group को 62 करोड़ की कंपनी से 10,000 करोड़ की कंपनी बना दिया


जे.आर.डी टाटा की नैतिकता

कोई भी देश जब विकास के पथ पर अग्रसर होता है तब वहाँ बड़े-बड़े उद्योगपति और राजनेताओं में साँठगांठ होना, थोड़े बहुत अंश तक भ्रस्टाचार होना या अनीतिपूर्ण आचरण प्रवर्तमान होना आम बात होती है। लेकिन यह महानुभाव इन सब बुराइयों से परे थे। इन्होने सदैव नैतिकता और सदाचार का रास्ता अपनाया। यही कारण है कि आज भी टाटा ग्रुप भारत के सबसे विश्वशनीय बिजनेस हाउसेस में से एक है।

टाटा 50 वर्ष से अधिक समय तक ‘सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट’ के ट्रस्टी रहे और अपने मार्गदर्शन में राष्ट्रीय महत्व के कई संस्थानों की स्थापना की। इनमे प्रमुख हैं

  • टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (टीआईएसएस)
  • टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान( टीआईएफआर)
  • टाटा मेमोरियल सेंटर (एशिया का पहला कैंसर अस्पताल) और 
  • प्रदर्शन कला के लिए राष्ट्रीय केंद्र।

उन्ही के नेत्रत्व में सन् 1945 में टाटा मोटर्स की स्थापना हुई और उन्होंने सन् 1948 में भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन के रूप में ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ का शुभारंभ किया। भारत सरकार ने सन् 1953 में उन्हें एयर इंडिया का अध्यक्ष और इंडियन एयरलाइंस के बोर्ड का निर्देशक नियुक्त किया।
वे इस पद पर अगले 25 साल तक बने रहे।

पुरस्कार और सम्मान

समाज और देश के विकास में उनके योगदान को देखते हुए J.R.D TATA को कई राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

  • भारतीय वायु सेना ने जे.आर.डी. टाटा को ग्रुप कैप्टन के मानद पद से सम्मानित किया और बाद में उन्हें 
  • एयर कमोडोर के पद पर पदोन्नत किया और फिर 
  • 1 अप्रैल 1974 को एयर वाइस मार्शल पद से सम्मानित किया। 

विमानन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उनको कई पुरस्कार दिए गए – 

  • टोनी जेनस पुरस्कार (1979) 
  • फेडरेशन ऐरोनॉटिक इंटरनेशनेल द्वारा गोल्ड एयर पदक (1985) 
  • कनाडा स्थित अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन द्वारा एडवर्ड वार्नर पुरस्कार (1986) और 
  • डैनियल गुग्नेइनिम अवार्ड (1988)। 
  • भारत सरकार ने सन् 1955 में उन्हें पद्म विभूषण और 
  • सन 1992 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया।


निधन

जे. आर. डी. टाटा का निधन गुर्दे में संक्रमण के कारण 29 नवम्बर, 1993 में जिनेवा (स्विट्ज़रलैण्ड) में हो गया। उन‌की मृत्यु पर उनके सम्मान में भारतीय संसद ने अपनी कार्यवाही स्थगित कर दी थी। मरणोपरांत उन्हें उनके जन्मस्थान पेरिस में दफ़नाया गया।

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