एशिया विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है |BIGGEST PRODUCER OF RICE IN THE WORLD

चावल के सबसे बड़े उत्पादक देश |RICE PRODUCER COUNTRY IN THE WORLD

एशिया के दो सौ करोड़ से ज्यादा लोगों सीधे तौर पर जीवन जीने के लिए धान पर ही निर्भर हैं. एशिया में धान ही एक ऐसी खेती है जो हर तरह की जलवायु में होती है. नेपाल और भूटान में 10 हजार फुट से ऊंचे पहाड़ हों, या केरल में समुद्रतल से भी 10 फुट नीचे, हर जगह धान की खेती होती है।

 
इतिहास | HISTORY OF RICE
धान का वैज्ञानिक इतिहास यह है कि यह भी पहले अन्य पौधों की तरह जंगल में अपने-आप ही उगा करता था. अपने आप धान की बालियों से बीज धरती में समाते थे, फिर अंकुरित होते थे और इसके बाद पौधे तैयार होते रहते थे. आज जो धान है उसके बारे में कहा जाता है कि सदियों पहले इसकी शुरुआत उत्तरी हिमालय से
हुई थी. यहीं से धान हमारे देश के बाकी हिस्सों में और अफ्रीका के अलावा सारे संसार में फैला. भारत में धान कितनी पुरानी फसल है, इसका अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि झारखंड में राजमहल की पहाड़ियों से लेकर कम से कम 37 जगहों की खुदाई में धान के बीज मिले हैं. मोहनजोदड़ो (अब पाकिस्तान में) के अतिरिक्त
गुजरात में लोथल और रंगपुर में ईसा से दो हजार साल पहले का धान मिला है. उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश तथा पश्चिम बंगाल में प्राचीन स्थलों की खुदाई से भारत की प्राचीन धान-प्रधान संस्कृति का पता चलता है. चीन, जापान, कोरिया और थाइलैंड आदि देशों में की गई खुदाइयों में भी धान मिला है।

बौद्ध संस्कृति

बौद्ध संस्कृति में भी धान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. गौतम बुद्ध के पिता का नाम था शुद्धोदन. यानी शुद्ध चावल. वट वृक्ष के नीचे तप में लीन गौतम बुद्ध ने एक वन-कन्या सुजाता के हाथ से खीर खाने के बाद बोध प्राप्त किया और बुद्ध कहलाए।
बौद्ध धर्म के साथ ही धान की खेती और इसकी संस्कृति भारत के पड़ोसी देशों म्यांमार, इंडोनेशिया, थाइलैंड, चीन, जापान और कोरिया तक फैली. यानी दुनिया को धान भारत का ही दान है। आज से कोई 15 हजार से 16 हजार साल पहले हिमालय की उत्तरी और दक्षिणी ढलानों में जंगली धान लहराता था. ‘इंडिका’ किस्म का धान तापमान में हेर-फेर, यहां तक कि सूखा भी सह लेता था। हिमालय से यह धान उत्तरी और पूर्वी भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया के उत्तरी भाग और फिर दक्षिणी चीन में फैल गया।

म्यांमार | MYANMAR

पड़ोसी देश म्यांमार में 46 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है. यहां के कारेन कबीले के लोग धान में आत्मा मानते हैं और उसे केला कहते हैं।

इंडोनेशिया |INDONACIA

इंडोनेशिया कोई 36 हजार द्वीपों का देश है, यहां बाली और सुमात्रा के किसान धान-माता को देवी-श्री और धान-नाना को देवी-नीनी कहते हैं. बीज बोने से पहले उनमें से सबसे बढ़िया बालियां चुनकर देवीश्री बनाई जाती हैं. इन्हें सिर पर रखकर नाचते-गाते खेत में या कोठार में सजा देते हैं. इस तरह समस्त एशियाई देशों में देखें तो धान के विविध रूप देखने को मिलेंगे और सब जगह धान की महत्ता अलग-अलग रूपों में मिलेगी.

भारत | INDIA

एक बार फिर लौटकर अगर भारत की बात करें तो अपने देश से तो धान का रिश्ता अभिन्न ही रहा है. यहां चावल को खाया भी जाता है, चावल के अक्षत से ही पूजा होती है, चावल का इस्तेमाल तिलक लगाने में भी करते हैं और धान की बाली का तो शुभ कार्यों में इस्तेमाल होता ही है।धान को इसीलिए भारत और एशियाई देशों में अनाज की बजाय एक संस्कृति और परंपरा का भी नाम विद्वानों ने दिया है.एशियाई देशों में जितना गहरा रिश्ता भारत से मिलता है, धान का उतना ही गहरा रिश्ता एक और मुल्क जापान से भी मिलता है, जिसे जानना इस एक अनाज के कई पहलुओं को सामने लाता है।

जापान में धान भगवान | RICE GOD IN  JAPAN

जापान एक ऐसा देश है, जहां धान भगवान-सा दर्जा पा चुका है,  जापान में धान कोई तीन हजार साल पहले पहुंचा था. फिर जल्दी ही यह जापानी जीवन का अभिन्न अंग बन गया. यहां बचपन से ही धान को आदर देना सिखाया जाता है, मानो धान न हो, घर का कोई बड़ा-बूढ़ा हो. आज भी हर महीने के पहले, पंद्रहवें और अट्ठाइसवें दिन और सभी त्यौहारों पर जापानी घरों में लाल चावल बनाते हैं. जापान के एक प्रधानमंत्री हुए माकोसोने. सान के नाम का मतलब है- श्री मध्य जड़.  यहां खेत का मतलब धान के खेत से ही है. आज दुनिया में होंडा कंपनी का जलवा है. होंडा के माने हैं धान का मुख्य खेत और टोयोटा का मतलब है भरपूर फसल वाला धान का खेत, यानी धान में जहां भारत की जान बसती है, वहीं जापान में धान भगवान सरीखा रूप ले लेता है।

चीन |CHINA LEADING PRODUCER OF RICE

चीन में 90% से अधिक चावल का क्षेत्र सिंचित है, केवल अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति के तहत खेती की जाती है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक है – लगभग 193 मिलियन मीट्रिक टन (FAO 2008),
जिसका कुल विश्व चावल उत्पादन का 35% हिस्सा है।

हाइब्रिड चावल उत्पादन में चीन विश्व में अग्रणी है। 1970 के दशक के उत्तरार्ध में, चीन पहला देश था जिसने शीतोष्ण जलवायु वाले कृषि के लिए संकर चावल का सफलतापूर्वक उत्पादन किया। पारंपरिक चावल की तुलना में संकर चावल
की पैदावार 15-20 प्रतिशत अधिक होती है।

2009 के लिए अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार दुनिया के शीर्ष दस चावल उत्पादक इस प्रकार हैं:

चीन
इंडिया
इंडोनेशिया
बांग्लादेश
वियतनाम
थाईलैंड
म्यांमार
जापान
फिलीपींस
ब्राज़िल

भारत में चावल की खेती | RICE AGRICULTURE IN INDIA

भारत को चावल की खेती के मूल केंद्रों में से एक माना जाता है, जिसमें 44 मिलियन हेक्टेयर भूमि होती है। इसका चावल की कटाई का क्षेत्र दुनिया में सबसे बड़ा है। भारत में कुल आबादी का लगभग 65 प्रतिशत चावल खाते हैं और यह उनके खाद्य उत्पादन का 40 प्रतिशत है। चावल आधारित उत्पादन प्रणाली 50 मिलियन से अधिक घरों के लिए आय और रोजगार का मुख्य स्रोत प्रदान करती है।

पोषक तत्त्व | NUTRIENTS

चावल में ना सिर्फ फाइबर मौजूद होता है बल्कि इसमें विटामिन, कैल्शियम, आयरन, थायमीन और मिनरल्स जैसे पोषक तत्व समाए होते है।

तो इस आधार पर हम कह सकते हैं कि एशिया धान या चावल का प्रमुख उत्पादक है।

Asia is the leading producer of rice

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